सही जानकारी · कुंडली मिलान
कुंडली मिलान: रिश्ता तय करने से पहले 36 गुणों को समझिए
कुंडली मिलान, जिसे अष्टकूट या गुण मिलान भी कहते हैं, दो कुंडलियों को आठ कसौटियों पर परखने की पुरानी विधि है, जिसमें कुल 36 गुण होते हैं। यह पन्ना उन परिवारों और जोड़ों के लिए है जिनके हाथ में अंक तो आ गया है, पर उसका मतलब साफ़ नहीं है।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- 36 में से 16 गुण मिले हैं। क्या रिश्ते के लिए मना कर दें?
- ऐप में नाड़ी दोष लिखा आ रहा है। क्या अब बात ख़त्म समझें?
- दो वेबसाइटों ने दो अलग-अलग अंक बताए। सही कौन-सा है?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- हर कूट के अंक, और जहाँ अंक कटे वहाँ उसकी वजह
- नाड़ी, भकूट या मांगलिक की बात परिहार के बाद टिकती है या नहीं
- दोनों कुंडलियों में सप्तम भाव, शुक्र और गुरु
- दोनों की चल रही दशा, और आने वाले वर्षों के लिए उसका संकेत
मिलान में देखा क्या जाता है
कुंडली मिलान में लड़के और लड़की की कुंडली आठ कसौटियों पर परखी जाती है। इन्हें कूट कहते हैं। हर कूट के अंक तय हैं, वर्ण के 1 से लेकर नाड़ी के 8 तक। सब मिलाकर 36 गुण बनते हैं।
आठों कूट सिर्फ़ चंद्रमा से निकलते हैं। जन्म के समय चंद्रमा किस राशि और किस नक्षत्र में था, बस इतना ही गिना जाता है। लग्न, बाक़ी ग्रह और भाव इस गिनती में आते ही नहीं।
दक्षिण भारत की परंपरा में रज्जु और वेध जैसी जाँचें भी होती हैं। बी.वी. रमन ने इन्हें विस्तार से लिखा है। इनके अंक नहीं होते।
18 गुण की बात और उसकी सीमा
आम तौर पर कहा जाता है कि 36 में से कम से कम 18 गुण मिलने चाहिए। यह चलन से बनी एक मोटी सीमा है। इसे कितनी सख़्ती से मानें, इस पर ज्योतिषी एकमत नहीं हैं।
सिर्फ़ अंक देखकर फ़ैसला करना मुझे ठीक नहीं लगता। चंद्रमा एक नक्षत्र में क़रीब एक दिन रहता है। उस दौरान जन्मे हर व्यक्ति के गुण आपके बच्चे से उतने ही मिलेंगे। फिर 24 गुण दो तरह से आ सकते हैं। कहीं नाड़ी के पूरे 8 कटे होते हैं, कहीं छोटे कूटों में थोड़े-थोड़े।
ऑनलाइन कैलकुलेटर यही अंक देते हैं, इससे आगे कुछ नहीं। उनकी सेटिंग अलग होती है, इसलिए नतीजे भी अलग आते हैं। दोष के परिहार, यानी छूट की स्थितियाँ, ज़्यादातर जाँची ही नहीं जातीं। चंद्रमा नक्षत्र की सीमा पर हो तो जन्म समय की ज़रा-सी चूक से नतीजा बदल सकता है।
नाड़ी और भकूट दोष
नाड़ियाँ तीन हैं: आदि, मध्य और अंत्य। दोनों की नाड़ी एक ही निकले तो नाड़ी दोष माना जाता है और 8 में से 0 अंक मिलते हैं। भकूट दोष तब माना जाता है जब दोनों की चंद्र राशियाँ आपस में दूसरी-बारहवीं, पाँचवीं-नौवीं या छठी-आठवीं पड़ें। तब 7 में से 0 अंक मिलते हैं।
जिस परंपरा ने ये दोष बताए, उसी ने परिहार भी बताए हैं। दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या दोनों स्वामी मित्र हों, तो भकूट दोष नहीं माना जाता। नाड़ी में दोनों का नक्षत्र एक हो पर चरण अलग हों, या राशि एक हो पर नक्षत्र अलग हों, तो छूट मानी जाती है। बी.वी. रमन राशि स्वामी वाली छूट नाड़ी पर भी लगाते हैं। सूचियाँ हर जगह एक-सी नहीं हैं, इसलिए दोष कहने से पहले मैं परिहार जाँचता हूँ।
पूरी कुंडली मिलाने से और क्या पता चलता है
गुण बताते हैं कि दोनों के चंद्रमा आपस में कितने अनुकूल हैं। पर विवाह का भाव तो सातवाँ है। इसलिए मैं दोनों कुंडलियों में सप्तम भाव और उसके स्वामी की स्थिति देखता हूँ। शुक्र और गुरु का बल देखता हूँ। मंगल भी देखता हूँ, उसके परिहार समेत।
फिर दशा की बारी आती है। आने वाले वर्षों में दोनों किस दशा से गुज़रेंगे, इससे अंदाज़ा होता है कि कौन-सा समय सहज रह सकता है और कब ज़्यादा धैर्य चाहिए। कैलकुलेटर से अंक मिलता है। कुंडली पढ़ने पर पता चलता है कि अंक कहाँ कटे, क्यों कटे, और उस बात में कितना वज़न है।
आठ कूट
हर कूट के अधिकतम अंक तय हैं और आठों चंद्रमा की राशि या नक्षत्र से निकलते हैं।
| कूट | अधिकतम अंक | क्या मिलाया जाता है |
|---|---|---|
| वर्ण | 1 | चंद्र राशि का वर्ण। इससे सोच और काम के प्रति रुझान का मेल माना जाता है। |
| वश्य | 2 | चंद्र राशि का वर्ग। इससे आपसी खिंचाव देखा जाता है, और यह भी कि कौन किसकी बात मानता है। |
| तारा (दिन) | 3 | दोनों के नक्षत्रों के बीच की गिनती। इसे कुशल-मंगल से जोड़ा जाता है। |
| योनि | 4 | हर नक्षत्र का प्रतीक पशु। इससे शारीरिक और स्वाभाविक मेल माना जाता है। |
| ग्रह मैत्री | 5 | दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की मित्रता। इससे मन का मेल माना जाता है। |
| गण | 6 | नक्षत्र का गण: देव, मनुष्य या राक्षस। इससे स्वभाव का मेल माना जाता है। |
| भकूट (राशि) | 7 | दोनों चंद्र राशियों की आपसी दूरी। इससे आपसी सामंजस्य और परिवार की ख़ुशहाली देखी जाती है। |
| नाड़ी | 8 | नक्षत्र की नाड़ी: आदि, मध्य या अंत्य। इसे शरीर की प्रकृति और सेहत से जोड़ा जाता है। |
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
ज्योतिष यह नहीं बता सकता कि दो लोग साथ में ख़ुश रहेंगे या नहीं। कोई भी अंक न विवाह की गारंटी देता है, न उसे नामुमकिन बताता है। फ़ैसला उन दोनों का और उनके परिवारों का है।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।