कुलदीप चतुर्वेदी, वैदिक ज्योतिषी। उदयपुर में, और ऑनलाइन भी
फ़ैसला बड़ा हो, तो रास्ता साफ़ नहीं दिखता।
फ़ैसला बड़ा हो,
तो रास्ता साफ़ नहीं दिखता।
शादी की बात हो, नौकरी की, कारोबार की, या समय ही साथ न दे रहा हो, अपना सवाल लेकर आइए। 35 साल से कुंडलियाँ देख रहा हूँ। जो दिखेगा, कारण के साथ साफ़ बताऊँगा।
तमसो मा ज्योतिर्गमय“मुझे अँधेरे से उजाले की ओर ले चलो।” बृहदारण्यक उपनिषद्
तमस् धुंध
सवाल इतने हैं कि क़दम ही नहीं उठता।
कब होगा? यही ठीक है या नहीं? कहीं ग़लती न हो जाए? हर रास्ता एक-सा लगता है, और कौन-सा कहाँ ले जाएगा, समझ नहीं आता।
गणित गणना
फिर मैं आपकी कुंडली लेकर बैठता हूँ।
आपके जन्म के समय कौन-सा ग्रह कहाँ था, यह गणित है, अंश-कला तक का पक्का हिसाब। उसका फल शास्त्र के आधार पर कहा जाता है। मैं जो भी कहूँगा, उसका कारण आपको कुंडली में दिखाऊँगा।
फलित फलादेश
देखिए, कुंडली कैसे पढ़ी जाती है।
मान लीजिए सवाल यह है: मेरा काम कब जमेगा?
- दसवाँ भाव काम-धंधे और मान-प्रतिष्ठा का है। पहले वही देखता हूँ।
- वहाँ शनि बैठा है। शनि देर से फल देता है, पर जो देता है वह टिकता है।
- दूसरे भाव से गुरु की दृष्टि भी है, यानी काम जमेगा तो कमाई भी होगी।
- अब बस समय देखना है: शनि की दशा कब लगेगी?
यह कुंडली सिर्फ़ समझाने के लिए बनाई गई है, ताकि आप देख सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है। यह किसी का भविष्यफल नहीं है।
विवेक परख
फिर बात आती है कि करना क्या है।
इस उदाहरण में गुरु की दशा पूरी हो रही है और शनि की लगने वाली है। तो हम यह तय करते हैं कि दशा बदलने से पहले क्या करना है, बदलते समय क्या, और उसके बाद क्या।
यह दशा-क्रम सिर्फ़ समझाने के लिए है।
सत्त्व उजाला
कब क़दम बढ़ाना है, और कब ठहरना।
आपके सवाल का सीधा जवाब मिलेगा। फ़ैसला फिर भी आपका ही रहेगा।