परामर्श · विवाह
विवाह ज्योतिष: शादी में देर हो, मन में शंका हो या रिश्ता तय करना हो
इस परामर्श में मैं आपकी कुंडली से तीन बातें देखता हूँ: शादी का समय कब बनता है, आपके लिए कैसा साथी ठीक रहेगा, और जो रिश्ता सामने है वह कितना मेल खाता है। मांगलिक होने या गुण कम मिलने जैसी बातों को उतना ही वज़न देता हूँ जितना उनका बनता है, ताकि फ़ैसला डर के मारे न लिया जाए।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- सब कहते हैं हमारा बेटा मांगलिक है। क्या सच में इससे उसकी शादी में दिक़्क़त आएगी?
- हमारे 36 में से 17 ही गुण मिले हैं। फिर भी रिश्ता आगे बढ़ाएँ क्या?
- मैं तीस पार कर चुकी हूँ और अब तक कहीं बात नहीं बनी। क्या मेरी कुंडली में ही शादी देर से लिखी है? यह देर कब तक चलेगी?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- दशा और गोचर से शादी के संभावित समय, और देर हो रही है तो क्यों।
- कुंडली मिलान, जो 36 गुणों की गिनती पर नहीं रुकता। दोनों की पूरी कुंडलियाँ साथ रखकर देखी जाती हैं।
- मांगलिक, नाड़ी या भकूट की चिंता में कितना दम है, और किन बातों से इनका परिहार हो जाता है।
- दोनों का स्वभाव और ज़रूरतें, और किन बातों में एक-दूसरे के हिसाब से ढलना पड़ेगा।
कुंडली
विवाह के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं
कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।
जीवनसाथी, शादी, और रिश्ता निभाने में आप ख़ुद कैसे हैं।
आपका अपना बसाया परिवार और वह परिवार जिससे आप जुड़ते हैं, घर का साझा पैसा, और घर में आपकी बोलचाल।
रिश्ता कितना टिकाऊ है, ससुराल और उसके साधन, और बदलाव आने पर दोनों कैसे सँभलते हैं।
निजी जीवन, आराम और पति-पत्नी की निकटता। साथ ही दूरी भी, जैसे अलग-अलग जगह या विदेश में रहना।
इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं
ग्रह-स्थितियाँ
विवाह में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है
नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।
| स्थिति | शास्त्र में माना गया फल | जीवन में अक्सर क्या दिखता है |
|---|---|---|
| मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो (मांगलिक) | मंगल दोष की पूरी परिभाषा बस इतनी ही है। इसका अर्थ यह लिया जाता है कि गृहस्थी में स्वभाव की तेज़ी और अपनी बात पर ज़ोर कुछ ज़्यादा रहता है। पहला भाव गिनें या दूसरा, इस पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं। और जब बारह में से छह भाव गिन लिए गए, तो बहुत बड़ी संख्या में लोग मांगलिक निकलते ही हैं। | ऐसे लोग ज़्यादातर साफ़ बोलने वाले होते हैं, बात का तुरंत जवाब देते हैं और घर में दबकर रहना उन्हें मंज़ूर नहीं होता। इसलिए कई बार बहस जल्दी गरम हो जाती है। |
| मांगलिक कुंडली में मंगल स्वराशि या उच्च राशि में हो, या गुरु अथवा चंद्र के साथ हो या उनकी दृष्टि में हो | मांगलिक के जो परिहार सबसे ज़्यादा बताए जाते हैं, वे यही हैं। लड़का और लड़की दोनों मांगलिक हों, तो वह भी परिहार गिना जाता है। | तब वही तेज़ी अक्सर झगड़े में नहीं, जोश और अपनों की हिफ़ाज़त में दिखती है। देखने में यही आता है कि ज़्यादातर मांगलिक कुंडलियों में ऐसा कोई न कोई परिहार निकल आता है। |
| शनि सप्तम भाव में हो या सप्तम भाव पर उसकी दृष्टि हो | माना जाता है कि ऐसे में शादी घरवालों की सोची हुई उम्र से कुछ देर से होती है, और व्यक्ति रिश्ते को गंभीरता और ज़िम्मेदारी से लेता है। सप्तम में शनि को दिग्बली माना गया है। | ऐसे लोगों की शादी अक्सर कुछ इंतज़ार के बाद होती है। रिश्ते में खुलकर जताया गया प्यार कम, ज़िम्मेदारी और ठहराव ज़्यादा रहता है। |
| सप्तमेश स्वराशि या उच्च राशि में हो | बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार इससे जीवनसाथी का सुख मिलता है और शादी की नींव पक्की रहती है। | ऐसे व्यक्ति को ज़्यादातर क़ाबिल साथी मिलता है और शादी से उसे सहारा मिलता है। फिर भी बाक़ी कुंडली का साथ होना ज़रूरी है। |
| शुक्र या सप्तमेश नवांश (D9) में अच्छी स्थिति में हो, ख़ासकर उसी राशि में जिसमें जन्म कुंडली में है | नवांश वह वर्ग कुंडली है जो विवाह के लिए देखी जाती है। यहाँ ग्रह बली हो, तो माना जाता है कि जन्म कुंडली में जो सुख दिखता है वह बरसों तक बना रहता है। | रिश्ता अक्सर समय के साथ और अच्छा होता जाता है। मुख्य कुंडली में जो कठिनाइयाँ दिखती हैं, वे रोज़ की गृहस्थी में सँभल जाने लायक़ लगती हैं। |
अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
कुंडली यह नहीं बता सकती कि आप किसी ख़ास व्यक्ति से शादी करें या न करें। वह सुखी गृहस्थी की गारंटी भी नहीं देती। कोई एक योग शादी का फ़ैसला नहीं करता, मांगलिक भी नहीं। फ़ैसला हमेशा उन दोनों का और उनके परिवारों का ही रहता है।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।