सही जानकारी · मांगलिक दोष
मांगलिक दोष: कुंडली मांगलिक निकली है तो पहले यह समझिए
कुंडली के कुछ ख़ास भावों में मंगल बैठा हो तो कुंडली मांगलिक कही जाती है। इसी को मंगल दोष या कुज दोष भी कहते हैं। यह पन्ना उन परिवारों के लिए है जिन्हें बताया गया है कि बेटा या बेटी मांगलिक है, और जो जानना चाहते हैं कि इस बात में कितना वज़न है।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- मेरी बेटी मांगलिक है। क्या उसकी शादी मांगलिक लड़के से ही होनी चाहिए?
- एक ज्योतिषी ने कहा है कि दोष की शांति के लिए महँगी पूजा करवानी पड़ेगी। क्या यह सही है?
- लड़के वाले पूछ रहे हैं कि लड़की मांगलिक तो नहीं। हम क्या जवाब दें?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- कुंडली मांगलिक है भी या नहीं, और किस परिभाषा से
- कौन-से परिहार लागू होते हैं, और किस ग्रंथ या आचार्य के अनुसार
- मंगल के साथ सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु
- रिश्ते की बात चल रही हो तो दोनों कुंडलियों का आपसी मेल
मांगलिक किसे कहते हैं
मंगल कुछ ख़ास भावों में बैठा हो तो कुंडली मांगलिक कही जाती है। उत्तर भारत में ज़्यादातर पहला, चौथा, सातवाँ, आठवाँ और बारहवाँ भाव गिने जाते हैं। बी.वी. रमन ने 'मुहूर्त' में जो श्लोक दिया है, उसमें दूसरा, बारहवाँ, चौथा, सातवाँ और आठवाँ भाव हैं। वहाँ पहला भाव नहीं है। आजकल कई ज्योतिषी छहों गिन लेते हैं।
गिनती कहाँ से हो, इस पर भी मतभेद है। कुछ ज्योतिषी सिर्फ़ लग्न से गिनते हैं। कुछ चंद्रमा और शुक्र से भी गिनते हैं। रमन लिखते हैं कि लग्न से दोष सबसे हल्का, चंद्रमा से उससे ज़्यादा और शुक्र से सबसे ज़्यादा माना जाता है।
सीधा हिसाब
बारह में से छह भाव, यानी आधे। सिर्फ़ लग्न से गिनें तो मोटे तौर पर हर दूसरी कुंडली मांगलिक निकलेगी। चंद्रमा और शुक्र से भी गिनें तो ज़्यादातर कुंडलियाँ किसी न किसी गिनती में आ ही जाती हैं।
जो बात इतनी आम हो, वह अकेले किसी विवाह का भविष्य तय नहीं कर सकती। बी.वी. रमन ने लिखा है कि कुज दोष को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व दिया जाता है और इसकी वजह से कई अच्छे रिश्ते रुक गए। मेरे लिए 'मांगलिक' शब्द जानकारी भर है। यह कोई फ़ैसला नहीं है।
परिहार: दोष कब नहीं माना जाता
सबसे ज़्यादा ये परिहार बताए जाते हैं। मंगल अपनी राशि मेष या वृश्चिक में हो, या उच्च राशि मकर में हो। मंगल पर गुरु की दृष्टि हो या गुरु साथ बैठा हो। रमन चंद्रमा के साथ युति को भी गिनते हैं। लग्न में गुरु या शुक्र हो। दोनों कुंडलियाँ मांगलिक हों।
रमन ने भाव के हिसाब से राशियों की छूट भी दी है। जैसे दूसरे भाव में मिथुन या कन्या का मंगल, और किसी भी भाव में सिंह या कुंभ का मंगल। सूचियाँ हर जगह एक-सी नहीं मिलतीं। 28 वर्ष के बाद दोष ख़त्म हो जाने की बात लोगों में चलती है। जिन ग्रंथों का हवाला दिया जाता है, उनमें यह नहीं मिलती। मैं इसे आधार नहीं बनाता।
परिवार घबराते क्यों हैं
इसकी तीन वजहें हैं। पुराने श्लोकों की भाषा कठोर है। सॉफ़्टवेयर बिना कुछ समझाए 'मांगलिक: हाँ' छाप देता है। और कुछ लोग इसी डर के सहारे उपाय बेचते हैं। कुंभ विवाह जैसे अनुष्ठान प्रचलित हैं। मैं इन्हें न बेचता हूँ, न करवाने को कहता हूँ।
मैं देखता हूँ कि मंगल किस भाव और किस राशि में है, कितना बली है, उस पर किसकी दृष्टि है और कोई परिहार लागू होता है या नहीं। फिर सप्तम भाव, उसका स्वामी, शुक्र और चल रही दशा देखता हूँ। दूसरी कुंडली भी इसी तरह पढ़ता हूँ। उसके बाद साफ़ बताता हूँ कि बात में कितना वज़न है।
छह भावों में मंगल
हर स्थिति के बारे में परंपरा क्या कहती है, यह यहाँ नरम शब्दों में लिखा है। साथ में यह भी कि उसे वज़न देने से पहले मैं क्या देखता हूँ।
| मंगल कहाँ है | परंपरा में क्या माना जाता है | संतुलित नज़र से |
|---|---|---|
| पहला भाव | स्वभाव। जल्दी ग़ुस्सा आना और अपनी बात मनवाने की आदत। यहाँ से मंगल की दृष्टि सप्तम पर पड़ती है। | कुछ सूचियों में यह भाव है ही नहीं। अक्सर इसे साफ़ बोलने वाले और जोशीले स्वभाव का संकेत माना जाता है। मैं राशि और गुरु की दृष्टि देखता हूँ। |
| दूसरा भाव | वाणी और कुटुंब। तीखे बोल से घर में खटपट हो सकती है। | उत्तर भारत की सूचियों में यह भाव प्रायः नहीं गिना जाता। रमन मिथुन और कन्या में छूट मानते हैं। मैं इसे द्वितीयेश के साथ पढ़ता हूँ। |
| चौथा भाव | घर की शांति। गृहस्थी में बेचैनी। यहाँ से मंगल की दृष्टि सप्तम पर पड़ती है। | रमन मेष और वृश्चिक में छूट मानते हैं। कुछ कहने से पहले मैं चतुर्थेश और चंद्रमा देखता हूँ। |
| सातवाँ भाव | दांपत्य का अपना भाव। बहस और इस बात की खींचतान कि किसकी चलेगी। | सप्तम विवाह का भाव है, इसलिए इस स्थिति को सबसे गंभीर माना जाता है। फिर भी राशि, सप्तमेश, गुरु और दूसरी कुंडली देखे बिना कुछ नहीं कहा जा सकता। |
| आठवाँ भाव | पुराने श्लोक यहाँ सबसे कठोर हैं। सीधी भाषा में: साझा धन, ससुराल या अचानक बदलाव को लेकर तनाव। | मैं इसे किसी अनिष्ट की भविष्यवाणी नहीं मानता। रमन धनु और मीन में छूट मानते हैं। वज़न मंगल के बल और उस पर पड़ती दृष्टि से तय होता है। |
| बारहवाँ भाव | ख़र्च, दूरी और निजी जीवन में सहजता की कमी। यहाँ से मंगल की दृष्टि सप्तम पर पड़ती है। | रमन वृषभ और तुला में छूट मानते हैं। मैं द्वादशेश और शुक्र देखता हूँ। |
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
ज्योतिष यह नहीं बता सकता कि मंगल की वजह से कोई विवाह चलेगा या नहीं चलेगा। मांगलिक होना कई बातों में से बस एक बात है, और इसके आधार पर मैं किसी के अनिष्ट की भविष्यवाणी नहीं करता।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।