सही जानकारी · साढ़े साती

साढ़े साती: लग गई है तो घबराने से पहले इसे समझिए

शनि जब आपकी चंद्र राशि से पिछली राशि, चंद्र राशि और अगली राशि से गुज़रता है, तो इन क़रीब साढ़े सात सालों को साढ़े साती कहते हैं। जिन्हें बताया गया है कि साढ़े साती लग गई है या लगने वाली है, और जो इसे बिना घबराए समझना चाहते हैं, यह पन्ना उनके लिए है।

लोग अक्सर यह पूछते हैं

  • कहते हैं मेरी साढ़े साती शुरू हो गई है। क्या मुझे डरना चाहिए?
  • पंडित जी ने कहा अगले सात साल भारी हैं। क्या यह सच है?
  • जो पूजा और अँगूठी बताई गई है, क्या वह सचमुच ज़रूरी है?

परामर्श

परामर्श से आपको क्या मिलेगा

  • अभी साढ़े साती या ढैया चल रही है या नहीं, और हर चरण की तारीख़ें
  • जन्म कुंडली में शनि का बल और भूमिका, और चंद्रमा की स्थिति
  • साथ चल रही दशा, और वह जीवन के किन हिस्सों की ओर इशारा करती है
  • इस दौर में कौन-से फ़ैसले ठीक बैठते हैं, और कौन-से ठहरकर लेने चाहिए

साढ़े साती क्या है

साढ़े साती यानी साढ़े सात साल। शनि जब आपकी चंद्र राशि से ठीक पहले वाली राशि में आता है, तब यह शुरू होती है। फिर शनि चंद्र राशि में आता है, और उसके बाद अगली राशि में। हर राशि में वह क़रीब ढाई साल रहता है। तीनों मिलाकर साढ़े सात साल बनते हैं।

शनि को पूरा राशि चक्र घूमने में लगभग साढ़े उनतीस साल लगते हैं। इसलिए ज़्यादातर लोगों के जीवन में साढ़े साती दो या तीन बार आती है। गिनने का तरीक़ा भी सबका एक नहीं है। अधिकतर ज्योतिषी राशि से गिनते हैं। कुछ चंद्रमा से 45 अंश पहले और 45 अंश बाद तक गिनते हैं। इससे शुरू होने की तारीख़ कुछ महीने आगे-पीछे हो सकती है।

तीन चरण

इन्हें चढ़ती, बीच की और उतरती साढ़े साती कहा जाता है। पहले चरण में शनि चंद्र राशि से बारहवें होता है। लोग अक्सर बताते हैं कि ख़र्च बढ़ा, जगह बदली, नींद हल्की रही। दूसरे चरण में शनि चंद्र राशि पर होता है। तब लोग अक्सर बताते हैं कि ज़िम्मेदारी बढ़ी, मन गंभीर रहा, नतीजे देर से मिले। तीसरे चरण में शनि चंद्र राशि से दूसरे होता है। तब अक्सर पैसे, परिवार और बोलचाल पर ध्यान देना पड़ता है।

अधिकतर स्रोत बीच के चरण को सबसे भारी मानते हैं। कुछ कहते हैं कि यह चंद्र राशि पर निर्भर है। कुंडली देखे बिना मैं दोनों में से कोई बात नहीं मानता।

डर क्यों है, और असल में क्या देखा जाता है

आँख से दिखने वाले ग्रहों में शनि सबसे धीमा है। उसे देरी, कर्तव्य और कर्मफल का ग्रह माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक माना जाता है। इसलिए चंद्रमा पर शनि का लंबा गोचर मन की लंबी परीक्षा समझा गया। डर यहीं से चला। फिर यह डर बिकने भी लगा। साढ़े साती के नाम पर तेल का चढ़ावा, अनुष्ठान और रत्न ख़ूब बेचे जाते हैं। मैं इनमें से कुछ नहीं बेचता।

परंपरा ख़ुद इतनी कठोर नहीं है। तीन बातें तौली जाती हैं। जन्म कुंडली में शनि कितना बलवान है और किन भावों का स्वामी है। उस समय कौन-सी दशा चल रही है। और जन्म का चंद्रमा किस हाल में है। वृषभ और तुला लग्न के लिए शनि योगकारक माना जाता है। बी.वी. रमन ने भी गोचर को जन्म कुंडली और अष्टकवर्ग के साथ मिलाकर पढ़ने की बात कही है।

इन सालों में काम, और ढैया

बहुत-से लोग अपना सबसे ठोस और टिकाऊ काम साढ़े साती में ही करते हैं। पढ़ाई पूरी होती है, कारोबार जमता है, घर बनता है, पद मिलता है। शनि को लगातार मेहनत का फल देने वाला ग्रह माना जाता है। ये साल झटपट फ़ायदे के बजाय धीरे-धीरे, जमकर किए जाने वाले काम के लिए ज़्यादा ठीक माने जाते हैं।

ढैया छोटा गोचर है, क़रीब ढाई साल का। शनि चंद्र राशि से चौथे या आठवें हो, तब उसे ढैया कहते हैं। चौथे शनि को अक्सर कंटक शनि या अर्धाष्टम शनि कहा जाता है, और आठवें को अष्टम शनि। ये नाम सब जगह एक जैसे नहीं चलते। कुछ लेखक चौथे, सातवें और दसवें, तीनों को कंटक शनि कहते हैं। ढैया भी कुंडली के साथ ही पढ़ी जाती है।

तीनों चरण एक नज़र में

अवधि मोटे तौर पर दी है, क्योंकि वक्री होने पर शनि कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौट भी आता है।

चरण (चंद्र राशि से शनि की जगह)लगभग कितना समयलोग अक्सर क्या बताते हैं
चढ़ती: शनि बारहवें, यानी चंद्र राशि से पिछली राशि मेंक़रीब ढाई सालख़र्च बढ़ना, यात्रा या जगह बदलना, नींद हल्की रहना
बीच की: शनि चंद्र राशि परक़रीब ढाई सालज़िम्मेदारी बढ़ना, मन गंभीर रहना, उतनी ही मेहनत पर नतीजे देर से मिलना
उतरती: शनि दूसरे, यानी चंद्र राशि से अगली राशि मेंक़रीब ढाई सालपैसे, परिवार और बोलचाल पर ध्यान; चीज़ें धीरे-धीरे सँभलना

इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता

कुंडली से किसी घटना की पक्की तारीख़ नहीं बताई जा सकती, न यह वादा किया जा सकता है कि कोई साल अच्छा या बुरा ही जाएगा। मैं कोई गारंटी नहीं देता और साढ़े साती के उपाय नहीं बेचता।

अपना सवाल लेकर आइए।

बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।

परामर्श का समय लीजिए