परामर्श · करियर

करियर ज्योतिष: जब मेहनत के बाद भी काम आगे न बढ़े

इस परामर्श में मैं देखता हूँ कि आपके लिए किस तरह का काम ठीक बैठता है, किस समय मेहनत की क़द्र होती है और किस समय फल देर से मिलता है। आप काम का क्षेत्र चुन रहे हों, नौकरी बदलने की सोच रहे हों या तरक़्क़ी की राह देख रहे हों, मक़सद यही है कि आप फ़ैसला साफ़ मन से लें।

लोग अक्सर यह पूछते हैं

  • मैं इतनी मेहनत करती हूँ, फिर भी तरक़्क़ी हर बार दूसरों को पहले क्यों मिल जाती है?
  • नौकरी अभी बदल लूँ या एक साल और रुक जाऊँ?
  • बेटा जिस काम में है, वह उसके लिए सही है? या उसने ग़लत वजह से चुन लिया था?

परामर्श

परामर्श से आपको क्या मिलेगा

  • कौन-से क्षेत्र और किस तरह का काम आपकी कुंडली से मेल खाता है, और कौन-सा आपको थका देता है
  • अभी की दशा बदलाव का साथ देती है या जहाँ हैं वहीं टिके रहने का
  • वरिष्ठों, सहकर्मियों और काम की क़द्र को लेकर बार-बार लौटने वाली बातें
  • आने वाले बरसों में तरक़्क़ी, देरी या बदलाव के संभावित दौर

कुंडली

करियर के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं

कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।

10दशम भाव (कर्म)

पेशा, पद, समाज में साख, और वह काम जिससे लोग आपको जानते हैं।

6षष्ठ भाव (नौकरी, सेवा)

सेवा, नौकरी, रोज़ का काम, मुक़ाबला, और दबाव में आप कैसे टिकते हैं।

2द्वितीय भाव (धन)

वह कमाई जो हाथ में टिकती है, और वाणी, जो काम का औज़ार है।

11एकादश भाव (लाभ)

काम से होने वाला लाभ, वेतन में बढ़ोतरी, जान-पहचान और वरिष्ठों का साथ।

इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं

शनिकाम का कारक। अनुशासन, सहने की ताक़त, सेवा, और धीरे-धीरे मेहनत से कमाई हुई तरक़्क़ी।
सूर्यअधिकार, मान-सम्मान, सरकार, और अपने से ऊपर के लोगों से आपकी कैसी बनती है।
बुधहुनर, परख, बातचीत और व्यापार।
दशमेशदशम भाव का स्वामी किस भाव और राशि में बैठा है और कितना बली है, इससे पता चलता है कि करियर को दिशा कहाँ से मिलती है। यही बात दशमांश (D10) कुंडली में दोबारा जाँची जाती है।

ग्रह-स्थितियाँ

करियर में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है

नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।

स्थितिशास्त्र में माना गया फलजीवन में अक्सर क्या दिखता है
शनि दशम भाव में होइसका अर्थ लिया जाता है कि तरक़्क़ी धीरे-धीरे और मेहनत से होती है। नाम कितना मिलेगा, इस पर शास्त्रीय ग्रंथ एकमत नहीं हैं।तरक़्क़ी अक्सर देर से मिलती है। पर जो पद एक बार मिल जाए, वह ज़्यादातर टिकता है।
सूर्य दशम भाव में होयहाँ सूर्य दिग्बली होता है। इसे अधिकार वाले और सबकी नज़र में रहने वाले काम की ओर झुकाव माना जाता है।ऐसे लोगों को ज़िम्मेदारी प्रायः जल्दी सौंप दी जाती है। जहाँ उनकी कोई सुनवाई न हो, वहाँ वे अक्सर बेचैन रहते हैं।
दशमेश एकादश भाव में होमाना जाता है कि ऐसे व्यक्ति का काम आमदनी भी दिलाता है और ऐसी जान-पहचान भी, जो आगे काम आती है।मेहनत का दाम ज़्यादातर मिल जाता है। मौक़े अक्सर उन्हीं लोगों से आते हैं जिन्हें आप पहले से जानते हैं।
लग्न या चंद्र से दशम में नैसर्गिक शुभ ग्रह हो (अमल योग)फलदीपिका के अनुसार इससे पेशे में साफ़-सुथरी और टिकाऊ साख बनती है।ऐसे लोगों को अक्सर नाज़ुक और भरोसे का काम सौंपा जाता है। विवाद हो भी जाए, तो उनका नाम ज़्यादातर बेदाग़ रहता है।
नवमेश और दशमेश की युति हो या राशि परिवर्तन हो (धर्म-कर्माधिपति योग)पद में उन्नति के मज़बूत योगों में इसकी गिनती होती है, बशर्ते दोनों ग्रह ख़ुद अच्छी हालत में हों।काम और अपने उसूल अक्सर एक ही दिशा में चलते हैं। कई बार कोई मार्गदर्शक या संस्था आगे का रास्ता खोल देती है।

अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।

इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता

कुंडली आपकी कंपनी का नाम, आपका पद या तरक़्क़ी की तारीख़ नहीं बता सकती। वह झुकाव और समय बताती है। नतीजा फिर भी आपके हुनर, आपके फ़ैसलों और आपके क्षेत्र के बाज़ार पर टिका रहता है।

अपना सवाल लेकर आइए।

बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।

परामर्श का समय लीजिए