परामर्श · अन्य सवाल

शिक्षा, विदेश, मुहूर्त और साढ़े साती

कुछ सवाल करियर, विवाह, धन और स्वास्थ्य से बाहर के होते हैं: कोई परीक्षा, विदेश जाना, किसी काम की तारीख़, मकान, या साढ़े साती जैसा कठिन समय। ऐसे में मैं कुंडली का वही हिस्सा देखता हूँ जिससे सवाल जुड़ा है, और बात साफ़ बताता हूँ, न बढ़ाकर, न घटाकर।

लोग अक्सर यह पूछते हैं

  • बेटी को दो कोर्स में से एक चुनना है। उसकी अपनी पसंद तो है ही, कुंडली उसमें क्या जोड़ती है? और उसकी पढ़ाई का समय कब ज़्यादा मज़बूत है?
  • हम विदेश जाने की सोच रहे हैं, या फिर वापस लौट आने की। क्या कुंडली वहाँ बसने का साथ देती है, और कब?
  • सब कह रहे हैं कि मेरी साढ़े साती लग गई है। मैं इसे कितनी गंभीरता से लूँ?

परामर्श

परामर्श से आपको क्या मिलेगा

  • पढ़ाई: विषय का चुनाव, परीक्षा का समय, और पढ़ाई के लिए ज़्यादा मज़बूत साल
  • विदेश जाना या घर लौटना, और किसके लिए कौन-सा समय अनुकूल रहता है
  • किसी काम के लिए मुहूर्त निकालना, और घर या जायदाद के लिए वास्तु की सलाह
  • साढ़े साती और दूसरे कठिन दौर की सही तस्वीर: जितनी बात है उतनी ही, बिना डराए

कुंडली

इन सवालों के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं

कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।

4चतुर्थ भाव (घर, सुख)

घर, ज़मीन-जायदाद, स्कूल की पढ़ाई और मन की शांति।

5पंचम भाव (बुद्धि)

बुद्धि, पढ़ाई-लिखाई, और परीक्षा व प्रतियोगिता में कैसा प्रदर्शन रहता है।

9नवम भाव (भाग्य, उच्च शिक्षा)

ऊँची पढ़ाई, गुरु, लंबी यात्राएँ और भाग्य।

12द्वादश भाव (विदेश, व्यय)

विदेश, जन्मस्थान से दूर रहना, और ख़र्च।

इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं

बुधसधी हुई बुद्धि का कारक: विश्लेषण, भाषा, गणित और परीक्षा में प्रदर्शन।
गुरुज्ञान, गुरुजन और ऊँची पढ़ाई का कारक।
राहुविदेश और अनजाने माहौल का कारक। बाहर जाने के सवाल में इसे देखा जाता है।
शनिसमय, देरी और टिकाऊपन का कारक। मकान बनवाने और साढ़े साती के सवाल में शनि देखा जाता है, ज़मीन के लिए मंगल।

ग्रह-स्थितियाँ

इन सवालों में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है

नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।

स्थितिशास्त्र में माना गया फलजीवन में अक्सर क्या दिखता है
गुरु पंचम भाव में होज्ञान का कारक बुद्धि के भाव में बैठा है, इसलिए इसे सीखने की अच्छी क्षमता और सही परख का संकेत माना जाता है।ऐसे लोग ज़्यादातर अच्छे गुरु के पास ही सबसे ज़्यादा सीखते हैं। जिन विषयों में रटने से ज़्यादा समझ चाहिए, उनमें वे अक्सर आगे रहते हैं।
राहु द्वादश भाव में हो, या नवमेश और द्वादशेश का आपसी संबंध होइसे विदेश से गहरे जुड़ाव का संकेत माना जाता है। बात कब बनेगी, यह चल रही दशा पर निर्भर है।कई बार लंबे समय तक विदेश में रहना होता है, या काम और पढ़ाई बार-बार जन्मस्थान से दूर ले जाते हैं।
शुक्ल पक्ष का चंद्र अनुकूल नक्षत्र में हो, और तिथि व वार भी ठीक होंइसे अनुकूल मुहूर्त माना जाता है। बी.वी. रमन लिखते हैं कि पंचांग के पाँच अंगों में तिथि, नक्षत्र और वार का वज़न सबसे ज़्यादा है।आम तौर पर मैं आपको दो-तीन ऐसे मुहूर्त देता हूँ जो सचमुच निभ सकें, हर एक का कारण साथ में, ताकि आप अपनी सुविधा और मजबूरियाँ देखकर चुन लें।
बली मंगल का चतुर्थ भाव या चतुर्थेश से संबंध होमंगल ज़मीन का कारक है और चौथा भाव जायदाद का, इसलिए इसे अपनी ज़मीन या मकान होने में सहायक माना जाता है।ऐसे लोगों का मन कम उम्र से ही ज़मीन-जायदाद की ओर रहता है, और जायदाद अक्सर मंगल या चतुर्थेश की दशा में बनती है।
जन्म राशि से बारहवीं राशि, स्वयं जन्म राशि और उससे दूसरी राशि में शनि का गोचर (साढ़े साती)यह लगभग साढ़े सात साल का समय है, जिसमें, माना जाता है, ज़िम्मेदारी बढ़ती है और फल देर से मिलता है। इसका असर कितना होगा, यह पूरी कुंडली और चल रही दशा से तय होता है।बहुत-से लोगों को इन सालों में मेहनत ज़्यादा करनी पड़ती है, कोई छोटा रास्ता नहीं मिलता, और क्या पहले करना है, क्या बाद में, यह नए सिरे से तय करना पड़ता है। कुछ लोग अपना सबसे पक्का काम इन्हीं सालों में करते हैं।

अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।

इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता

ज्योतिष परीक्षा के नतीजे, वीज़ा, जायदाद के सौदे या मुहूर्त देखकर किए गए काम की सफलता की गारंटी नहीं दे सकता। यह शिक्षक, इमिग्रेशन वकील, आर्किटेक्ट या वित्तीय सलाहकार की सलाह की जगह भी नहीं ले सकता।

अपना सवाल लेकर आइए।

बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।

परामर्श का समय लीजिए