परामर्श · व्यापार
व्यापार ज्योतिष: नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करें या नहीं
इस परामर्श में मैं देखता हूँ कि आपकी कुंडली अपने काम-धंधे की ओर झुकती है या नौकरी की ओर, और साझेदारी आपको कैसी फलती है। नया काम हो, साझेदार चुनना हो या शुरुआत का समय तय करना हो, अपना स्वभाव साफ़ समझ में आ जाए तो तौलना आसान हो जाता है।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- बरसों से नौकरी में हूँ। अब अपना काम शुरू कर दूँ, या मैं नौकरी के लिए ही बना हूँ?
- जिनके साथ साझेदारी की बात चल रही है, उन पर भरोसा कर लूँ? या अकेले ही चलूँ?
- कारोबार चल तो रहा है, पर एक हद से आगे बढ़ता क्यों नहीं?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- कुंडली का झुकाव अपने व्यापार की ओर है, नौकरी की ओर, या स्वतंत्र पेशे की ओर
- साझेदारी आपको कैसी फलती है, और खटपट ज़्यादातर कहाँ होती है
- अभी की दशा नया काम शुरू करने का साथ देती है, काम फैलाने का, या जो है उसे जमाने का
- किस तरह का व्यापार या सेवा आपके स्वभाव से मेल खाती है
कुंडली
व्यापार के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं
कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।
साझेदारी, व्यापार, ग्राहक, और सामने वाले से होने वाला हर लेन-देन।
काम किस तरह का है, और बाज़ार में आपकी साख।
मुनाफ़ा, जान-पहचान, और यह कि मेहनत के हिसाब से कमाई होती है या नहीं।
पहल, हिम्मत, बेचने का हुनर और जोखिम उठाने की तैयारी।
इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं
ग्रह-स्थितियाँ
व्यापार में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है
नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।
| स्थिति | शास्त्र में माना गया फल | जीवन में अक्सर क्या दिखता है |
|---|---|---|
| बुध सप्तम भाव में हो | व्यापार का ग्रह लेन-देन के भाव में बैठे, तो इसे व्यापार और मोल-भाव की सहज समझ माना जाता है। | ऐसे लोग ग्राहकों के साथ प्रायः सहज रहते हैं। बँधी-बँधाई नौकरी के मुक़ाबले वे अक्सर सौदों से ज़्यादा कमाते हैं। |
| दशमेश सप्तम भाव में हो | माना जाता है कि ऐसा काम साझेदारों, ग्राहकों या अपने स्वतंत्र लेन-देन के सहारे चलता है। | काम में तरक़्क़ी अक्सर इस पर टिकी रहती है कि साथ में कौन है। जीवनसाथी या साझेदार का हाथ भी बहुत बार रहता है। |
| सप्तमेश का द्वितीयेश (धनेश) या एकादशेश (लाभेश) से संबंध हो | आम तौर पर इसका अर्थ लिया जाता है कि व्यापार और साझेदारी से कमाई और बचत बनती है। | कमाई का मुख्य ज़रिया ज़्यादातर व्यापार का लेन-देन ही होता है। कारोबार अक्सर उन ग्राहकों के दम पर बढ़ता है जो बार-बार लौटते हैं। |
| दशमेश षष्ठ भाव में हो और षष्ठ भाव बली हो | इसे सेवा, नौकरी और जमी-जमाई व्यवस्था के भीतर काम करने की ओर झुकाव माना जाता है। | ऐसे लोग अक्सर किसी संस्था में रहकर अच्छा काम करते हैं। अपने कारोबार की अनिश्चितता उन्हें भारी बोझ लग सकती है। |
| मंगल तृतीय भाव में हो | पहल के इस भाव में मंगल अच्छा रहता है, इसलिए इसे हिम्मत और अपने दम पर की गई मेहनत का संकेत माना जाता है। | ऐसे लोग अक्सर नया काम झट से शुरू कर देते हैं और पूरे भरोसे से अपना माल बेच लेते हैं। पर लंबे समय तक टिके रहने का दम कुंडली में अलग से देखना पड़ता है। |
अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
कुंडली आपकी पूँजी, आपका बाज़ार, आपका माल या साझेदार की नीयत नहीं परख सकती। वह स्वभाव और समय बता सकती है। इसे व्यापार और क़ानून के जानकार की सलाह के साथ रखिए, उसकी जगह नहीं।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।