परामर्श · धन

धन और ज्योतिष: पैसा आता तो है, पर टिकता नहीं

इस परामर्श में मैं देखता हूँ कि आपकी कुंडली में कमाई, बचत और ख़र्च का ढंग कैसा है, और कौन-सा समय जोड़ने का है, कौन-सा हाथ रोककर चलने का। इससे आप अपनी कुंडली के हिसाब से योजना बना सकते हैं, किसी और की देखादेखी नहीं।

लोग अक्सर यह पूछते हैं

  • कमाई तो ठीक-ठाक है, फिर भी साल के आख़िर में हाथ में इतना कम क्यों बचता है?
  • हम मकान के लिए बड़ा क़र्ज़ लेने की सोच रहे हैं। अभी का समय ठीक है, या कुछ रुक जाएँ?
  • मेरे पति की आमदनी कभी एकदम बढ़ जाती है, फिर महीनों वहीं ठहरी रहती है। ऐसा क्यों होता है?

परामर्श

परामर्श से आपको क्या मिलेगा

  • कमाने, बचाने और ख़र्च करने का आपका अपना ढंग
  • अभी की दशा जोड़ने की है, जमा हुआ सँभालने की, या सँभलकर चलने की
  • पैसा कहाँ से रिस जाता है, और ख़र्च पर लगाम के बारे में कुंडली क्या संकेत देती है
  • जायदाद, क़र्ज़ या लंबी योजना जैसे बड़े फ़ैसलों का समय

कुंडली

धन के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं

कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।

2द्वितीय भाव (संचित धन)

जमा पूँजी, बचत, परिवार के साधन, और आप कितना सँभालकर रख पाते हैं।

11एकादश भाव (लाभ)

आमदनी, लाभ, मुनाफ़ा, और पैसों को लेकर जो सोचा है उसका पूरा होना।

5पंचम भाव (बुद्धि)

सूझ-बूझ, और सट्टे या जोखिम वाले फ़ैसले।

9नवम भाव (भाग्य)

भाग्य, बड़ों का साथ, और मौक़े कितनी आसानी से मिलते हैं।

इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं

गुरुधन का मुख्य कारक। धन की बढ़ोतरी, सही सलाह और कमाया हुआ सँभालकर रखने की क्षमता इसी से देखी जाती है।
शुक्रसुख-सुविधा, जायदाद, गाड़ी, और पैसा किस तरह की चीज़ों पर ख़र्च होता है।
बुधहिसाब-किताब, व्यापार और रोज़ का लेन-देन।
धनेश और लाभेशदूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी। ये कितने बली हैं और आपस में कैसे जुड़े हैं, इसी से पता चलता है कि कमाई और बचत साथ चलती हैं या नहीं।

ग्रह-स्थितियाँ

धन में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है

नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।

स्थितिशास्त्र में माना गया फलजीवन में अक्सर क्या दिखता है
धनेश एकादश भाव में हो, या लाभेश द्वितीय भाव मेंबृहत् पाराशर होरा शास्त्र में बचत और लाभ के भावों के इस मेल को धन दिलाने वाला योग कहा गया है।ऐसे लोगों की कमाई अक्सर बिना ज़्यादा खींचतान के बचत में बदल जाती है, और पैसा लगातार दोबारा लगाते रहने से बढ़ता है।
गुरु द्वितीय भाव में होधन का कारक जब धन के ही भाव में बैठा हो, तो उसे कमाने और जोड़कर रखने, दोनों में सहायक माना गया है।ऐसे लोग ज़्यादातर पैसों के मामले में सँभलकर चलते हैं और उन्हें सलाह भी ठीक मिलती है। परिवार के साधन कई बार काम आ जाते हैं।
पंचमेश या नवमेश की धनेश या लाभेश से युति हो (धन योग)माना जाता है कि इस योग में भाग्य और सूझ-बूझ का सीधा लाभ आमदनी और बचत को मिलता है।लाभ अक्सर कुछ ख़ास दौरों में आता है, ज़्यादातर इन्हीं ग्रहों की दशा में।
शनि एकादश भाव में होमाना जाता है कि यहाँ लाभ धीरे-धीरे और लगातार मेहनत से आता है, पर आने के बाद टिकता है।आमदनी अक्सर देर से जमती है और धीरे-धीरे बढ़ती है।
धनेश द्वादश भाव में होइसका अर्थ यह लिया जाता है कि साधन बाहर की ओर जाते हैं: ख़र्चों में, दूर की जगहों पर, या दूसरों की ज़रूरतों में।पैसा आता है, पर आते ही उसकी जगह तय हो चुकी होती है। बचत के लिए अक्सर अलग से पक्का इंतज़ाम करना पड़ता है।

अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।

इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता

ज्योतिष यह नहीं बता सकता कि कौन-सा शेयर, फ़ंड या प्लॉट ख़रीदना है, और यह किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की जगह नहीं ले सकता। कोई कुंडली यह वादा नहीं कर सकती कि इतनी रक़म आएगी या इस तारीख़ को आएगी।

अपना सवाल लेकर आइए।

बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।

परामर्श का समय लीजिए