परामर्श · स्वास्थ्य
कुंडली में स्वास्थ्य: जब सेहत और ऊर्जा ज़्यादा ध्यान माँगें
इस परामर्श में मैं कुंडली से आपकी प्रकृति देखता हूँ, जैसी शास्त्र में बताई गई है, और वे समय देखता हूँ जब शरीर की शक्ति कुछ कम या दबाव कुछ ज़्यादा रह सकता है। उन दिनों के हिसाब से आप आराम, दिनचर्या और काम का बोझ पहले से तय कर सकते हैं। डॉक्टर की देखरेख अपनी जगह चलती रहनी चाहिए।
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
यह चिकित्सा सलाह नहीं है। ज्योतिष किसी बीमारी को न पहचान सकता है, न उसका नाम बता सकता है, न इलाज कर सकता है। इसलिए हमेशा सबसे पहले डॉक्टर को दिखाइए। यहाँ कही किसी बात की वजह से इलाज न टालिए, न छोड़िए।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- कई महीनों से थकी-थकी रहती हूँ। क्या यह कुछ समय का दौर है? यह कब हल्का पड़ सकता है?
- अगले कुछ महीने काम बहुत रहेगा। बीच में हल्के हफ़्ते कब रखूँ?
- बेटी को तनाव रहता है और नींद बार-बार बिगड़ जाती है। कुंडली में इसे किस बात से जोड़कर देखा जाता है?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- शास्त्र के अनुसार कुंडली में आपकी प्रकृति और स्वभाव
- दशा और गोचर के वे समय जब ज़्यादा ध्यान रखना या काम हल्का रखना ठीक रहता है
- वे समय जो आराम करने और फिर से ताक़त जुटाने के लिए ज़्यादा अनुकूल रहते हैं
- तनाव, नींद और दिनचर्या का ढर्रा, और अपनी रफ़्तार सँभालने के सीधे-सादे तरीक़े
कुंडली
स्वास्थ्य के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं
कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।
शरीर, उसकी सामान्य शक्ति और मूल प्रकृति।
रोग का सामान्य विचार, रोज़ की दिनचर्या, और झेलने व फिर से सँभलने की क्षमता।
देर तक या धीरे-धीरे चलने वाली बातें, जिनमें धीरज रखना पड़ता है।
आराम, नींद, एकांत, और शक्ति का ख़र्च होना।
इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं
ग्रह-स्थितियाँ
स्वास्थ्य में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है
नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।
| स्थिति | शास्त्र में माना गया फल | जीवन में अक्सर क्या दिखता है |
|---|---|---|
| लग्नेश बली होकर केंद्र या त्रिकोण में हो (प्रथम, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम या दशम भाव) | शरीर का स्वामी अच्छी जगह बैठा है, इसलिए इसे मज़बूत प्रकृति और अच्छी भीतरी शक्ति का संकेत माना जाता है। | ऐसे लोग थकान या किसी झटके के बाद अक्सर उतनी जल्दी सँभल जाते हैं जितनी आसपास वालों को उम्मीद नहीं होती। |
| शनि षष्ठ भाव में हो | यह भाव मेहनत से बढ़ने का है और यहाँ क्रूर ग्रह अच्छा फल देने वाला माना गया है। इसलिए इसे सहनशक्ति और मुश्किलों में टिके रहने की क्षमता का संकेत समझा जाता है। | ऐसे लोग ज़्यादातर लंबे समय तक काम का भारी बोझ उठा लेते हैं। दबाव का पता उन्हें अक्सर तब चलता है जब वह धीरे-धीरे काफ़ी जमा हो चुका होता है। |
| मंगल षष्ठ भाव में हो | इसे तेज़ जोश, शारीरिक दमखम और मुक़ाबले के स्वभाव का संकेत माना जाता है। सारावली जैसे ग्रंथों ने इस स्थिति को अच्छा बताया है। | दमखम ज़्यादातर अच्छा रहता है। दिक़्क़त अक्सर उलटी होती है: हद से ज़्यादा कर लेना और आराम कम करना। |
| चंद्र के साथ शनि हो या चंद्र पर शनि की दृष्टि हो | ऐसा मन गंभीर और सतर्क माना जाता है, जो चिंता को आसानी से छोड़ नहीं पाता। | अक्सर रात को भी दिमाग़ चलता रहता है और दबाव के दिनों में नींद हल्की हो जाती है। बँधी हुई दिनचर्या से राहत मिलती है। |
अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।