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वास्तु परामर्श: आपके घर, दुकान, फ़ैक्टरी या दफ़्तर के लिए

वास्तु शास्त्र भवन और उसके कमरों को दिशाओं के हिसाब से बैठाने की पुरानी भारतीय विद्या है। जो नया मकान बना रहे हैं, या बने हुए घर, दुकान, फ़ैक्टरी या दफ़्तर को बिना डर और बिना तोड़-फोड़ के बेहतर ढंग से काम में लेना चाहते हैं, यह परामर्श उनके लिए है।

लोग अक्सर यह पूछते हैं

  • हम मकान बनाने वाले हैं। नक़्शा पक्का होने से पहले क्या-क्या देख लेना चाहिए?
  • किसी ने कहा कि हमारी रसोई ग़लत कोने में है। क्या उसे तोड़ना ही पड़ेगा?
  • फ़्लैट या किराये की दुकान में तो कुछ बदल नहीं सकते। तब क्या हो सकता है?

परामर्श

परामर्श से आपको क्या मिलेगा

  • भवन का मुख और उसके दरवाज़े, सही उत्तर दिशा से नापकर
  • हर कमरा या काम की जगह किस दिशा में पड़ती है
  • बिना तोड़-फोड़ के बदलाव: सामान की जगह, कमरों का उपयोग, रोज़ काम आने वाला दरवाज़ा
  • नए निर्माण में आपके और आर्किटेक्ट के लिए नक़्शे पर टिप्पणियाँ

वास्तु क्या है

वास्तु शास्त्र में भवन और उसके कमरे दिशाओं को देखकर रखे जाते हैं। मयमत और मानसार जैसे ग्रंथों में और बृहत्संहिता के तिरपनवें अध्याय में ज़मीन की परख, भवन की दिशा, नाप और अनुपात की बात है। नक़्शा वर्गों की जाली पर बनता है, जिसे वास्तु पुरुष मंडल कहते हैं। इसका बीच का हिस्सा ब्रह्मस्थान है।

विद्वानों का कहना है कि ये ग्रंथ मार्गदर्शन देते हैं, कड़े नियम नहीं। आज हर कमरे के लिए जो अलग-अलग नियम चलते हैं, उनमें बहुत कुछ बाद की परिपाटी है। जहाँ ऐसा है, वहाँ मैं साफ़ बता देता हूँ।

आठ दिशाएँ और ब्रह्मस्थान

हर दिशा का एक दिक्पाल और एक स्वभाव माना जाता है। ईशान, यानी उत्तर-पूर्व, जल का कोना माना जाता है। इसे खुला, नीचा और हल्का रखा जाता है। आग्नेय, यानी दक्षिण-पूर्व, अग्नि का कोना है, इसलिए रसोई वहाँ रखी जाती है। नैऋत्य, यानी दक्षिण-पश्चिम, भारी और स्थिर कोना माना जाता है। मुख्य शयनकक्ष और भारी सामान वहाँ ठीक रहता है। वायव्य, यानी उत्तर-पश्चिम, वायु और गति का कोना है। बीच का ब्रह्मस्थान खुला रखा जाता है।

हर बात पर सब स्रोत एकमत नहीं हैं। पश्चिम को कोई भोजन कक्ष के लिए ठीक बताता है, कोई भंडार या पानी की टंकी के लिए। नीचे की तालिका में सबसे प्रचलित मान्यता दी है।

नया निर्माण और बना हुआ भवन

नया मकान या भवन बना रहे हों तो नक़्शा पक्का होने से पहले आइए। तब ज़मीन का आकार और ढलान, भवन का मुख, मुख्य द्वार, कमरों की जगह, पानी और सीढ़ी, सब देखा जा सकता है। यह काम आपके आर्किटेक्ट के साथ मिलकर होता है।

बने हुए घर, दुकान, फ़ैक्टरी या दफ़्तर में मैं देखता हूँ कि कौन-सा कमरा किस काम आ रहा है। बिना तोड़-फोड़ के अक्सर काफ़ी कुछ बदल सकता है: पलंग, मेज़, चूल्हे और तिजोरी की जगह, कमरों का उपयोग, रोज़ काम आने वाला दरवाज़ा, भारी माल और मशीनों की जगह। प्लॉट, भवन का मुख, सीढ़ी, पिलर और पाइपलाइन जैसे हैं वैसे ही रहते हैं। मैं तोड़-फोड़ की सलाह नहीं देता।

रोशनी, हवा और सलाह का तरीक़ा

वास्तु की कई बातें मकान की अच्छी बनावट की सीधी समझ से मेल खाती हैं। पूर्व और ईशान खुला हो तो सुबह की धूप भीतर आती है। दक्षिण-पश्चिम में दीवारें भारी और खिड़कियाँ कम हों तो दोपहर बाद की तेज़ धूप कम लगती है। खुला ब्रह्मस्थान पुराने घरों का चौक ही है, जहाँ से रोशनी और हवा आती है।

सलाह मैं नाप से बने नक़्शे पर देता हूँ, जिसमें उत्तर दिशा सही दिखाई गई हो। उदयपुर और आसपास हों तो जगह पर आकर भी देखता हूँ। वास्तु आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर की जगह नहीं ले सकता। मैं यह दावा नहीं करता कि किसी नक़्शे से बीमारी या नुक़सान होता है। परंपरा क्या ठीक मानती है, व्यवहार में क्या हो सकता है और किसे जैसा है वैसा रहने देना चाहिए, यह साफ़ बता देता हूँ।

आठ दिशाएँ और ब्रह्मस्थान

यहाँ सबसे प्रचलित मान्यताएँ दी हैं। कुछ बातों पर ग्रंथों और वास्तुविदों में मतभेद है।

दिशापरंपरा में क्या माना जाता हैआम तौर पर क्या रखा जाता है
उत्तरकुबेर; धन और भंडारप्रवेश, बैठक, गल्ला या उत्तर की ओर खुलने वाली तिजोरी
उत्तर-पूर्व (ईशान)ईशान; जल; खुला, नीचा और हल्कापूजा की जगह, खुला हिस्सा, बोरिंग या ज़मीन के नीचे की टंकी
पूर्वइंद्र; सूर्योदय और रोशनीप्रवेश, बड़ी खिड़कियाँ, बैठक
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)अग्निरसोई; फ़ैक्टरी में बॉयलर, भट्ठी और बिजली का पैनल
दक्षिणयम; कुछ भारी और बंद रखा जाता हैशयनकक्ष, भंडार, मोटी दीवारें और कम खिड़कियाँ
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)निर्ऋति; भार और स्थिरतामुख्य शयनकक्ष, भारी सामान, भारी मशीनें, मालिक का केबिन
पश्चिमवरुण; उपयोग पर स्रोत एकमत नहींभोजन कक्ष, पढ़ाई का कमरा, भंडार या छत की टंकी
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)वायु; हवा और गतिमेहमानों का कमरा, भेजने के लिए तैयार माल, शौचालय, गाड़ी की जगह
केंद्र (ब्रह्मस्थान)ब्रह्मा; नक़्शे का खुला मध्य भागचौक या ख़ाली फ़र्श, जिस पर भारी बोझ और कबाड़ न हो

इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता

वास्तु आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर की जगह नहीं ले सकता, और सेहत, मुनाफ़े या किसी नतीजे का वादा नहीं कर सकता। बने हुए भवन में कुछ चीज़ें बदली नहीं जा सकतीं, और यह मैं आपको साफ़ बता देता हूँ।

अपना सवाल लेकर आइए।

बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।

परामर्श का समय लीजिए