परामर्श · रिश्ते
प्रेम और रिश्ते: जब कोई रिश्ता बार-बार दुख दे या समझ न आए
इस परामर्श में मैं देखता हूँ कि आप किसी से कैसे जुड़ते हैं, अपनों से आपको क्या चाहिए, और वही खटपट घूम-फिरकर क्यों लौट आती है। शादी से पहले का रिश्ता, दो लोगों का आपसी मेल, अलगाव और सुलह, घर-परिवार के रिश्ते, सब इसमें आते हैं।
लोग अक्सर यह पूछते हैं
- हम दोनों एक-दूसरे को चाहते हैं, फिर भी हर बार उसी बात पर झगड़ा हो जाता है। यह कभी बदलेगा भी?
- पिछले साल हम अलग हो गए थे। क्या सचमुच फिर से साथ आने की कोई गुंजाइश है?
- माँ से, या भाई से, मेरी कभी बनती क्यों नहीं? हमेशा खिंचाव ही क्यों रहता है?
परामर्श
परामर्श से आपको क्या मिलेगा
- आप किसी से कैसे जुड़ते हैं, और किसी के साथ निश्चिंत रहने के लिए आपको क्या चाहिए।
- दो कुंडलियों का आपसी मेल, और किन बातों पर खटपट बार-बार हो सकती है।
- दशा और गोचर से अलगाव या तनाव के दौर, और हालात कब से नरम पड़ने लगते हैं।
- माता-पिता, भाई-बहन और क़रीबी दोस्तों से रिश्ते, और खिंचाव की जड़ कहाँ है।
कुंडली
रिश्ते के लिए कौन-से भाव देखे जाते हैं
कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी एक पहलू का होता है। ऐसे सवाल में सबसे पहले ये भाव देखे जाते हैं। किसी भाव पर उँगली रखिए, वह ऊपर कुंडली में दिख जाएगा।
प्रेम, लगाव, और आपका दिल किसी से कैसे लगता है।
साथी, साथ निभाने का वादा, और बराबरी के रिश्ते में आप सामने वाले से कैसे पेश आते हैं।
घर, माता, और मन को मिलने वाला सुकून और सुरक्षा।
मित्र, बड़े भाई-बहन और वे लोग जो आपके साथ खड़े रहते हैं।
इसमें कौन-से ग्रह देखे जाते हैं
ग्रह-स्थितियाँ
रिश्ते में कुछ ग्रह-स्थितियों का क्या फल माना जाता है
नीचे एक-एक स्थिति का वह फल लिखा है जो शास्त्र में माना गया है, ताकि आप समझ सकें कि बात किस आधार पर कही जाती है।
| स्थिति | शास्त्र में माना गया फल | जीवन में अक्सर क्या दिखता है |
|---|---|---|
| पंचमेश और सप्तमेश की युति हो, दोनों की एक-दूसरे पर दृष्टि हो, या राशि परिवर्तन हो | माना जाता है कि ऐसा प्रेम आगे चलकर पक्के रिश्ते की ओर बढ़ता है। अपनी पसंद की शादी के लिए सबसे ज़्यादा इसी योग का नाम लिया जाता है। | ऐसे लोग ज़्यादातर चाहते हैं कि जिससे प्रेम हो, उसी से शादी हो। सिर्फ़ दूसरों का चुना हुआ रिश्ता मान लेना उन्हें अक्सर कठिन लगता है। |
| शुक्र और मंगल एक ही राशि में हों | इसे गहरे आकर्षण और जोशीले स्वभाव का योग माना जाता है, जिसमें प्यार और अपनी बात मनवाने की ज़िद, दोनों घुले-मिले रहते हैं। | रिश्ते अक्सर जल्दी शुरू होते हैं और बहुत गहरे लगते हैं। यही तेज़ी कई बार तीखी तकरार में भी निकलती है, और फिर मान-मनौवल हो जाता है। |
| चंद्र के साथ शनि हो या चंद्र पर शनि की दृष्टि हो | इसे गंभीर और अपनी बात मन में रखने वाले स्वभाव का संकेत माना जाता है। ऐसा मन महसूस तो गहराई से करता है, पर जताने में देर लगाता है। | मन दुखी हो तो ऐसे लोग अक्सर कटे-कटे से लगते हैं और बात करने से पहले थोड़ा समय चाहते हैं। पर एक बार भरोसा बन जाए, तो साथी उन्हें ज़्यादातर वफ़ादार और ठहरा हुआ बताते हैं। |
| शुक्र के साथ राहु हो | आम तौर पर इसका अर्थ लिया जाता है कि मन अनजानी, अलग चीज़ की ओर खिंचता है, और चाह तेज़ होती है। साथी दूसरी संस्कृति, दूसरे समाज या अलग पृष्ठभूमि का भी हो सकता है। | ऐसे लोग अक्सर वह रिश्ता चुनते हैं जिसकी घरवालों को उम्मीद नहीं थी। उन्हें कई बार यह परखना पड़ता है कि सचमुच मेल है या सिर्फ़ खिंचाव। |
| चंद्र चतुर्थ भाव में हो | चंद्र माता और मन का कारक है। इसलिए घर के भाव में बैठा चंद्र माता से गहरे लगाव और बसे-बसाए घर की बड़ी ज़रूरत का संकेत माना जाता है। | ऐसे लोगों के मन को सहारा ज़्यादातर घर और परिवार से मिलता है। घर का माहौल बिगड़े, तो प्रेम के रिश्ते में भी मन अक्सर बेचैन रहने लगता है। |
अकेली कोई एक स्थिति कुछ तय नहीं करती। पूरी कुंडली, हर ग्रह का बल और चल रही दशा, सब मिलाकर देखना पड़ता है। एक ही स्थिति दो कुंडलियों में बिलकुल अलग फल दे सकती है।
इसमें ज्योतिष क्या नहीं बता सकता
कुंडली आपका अपना स्वभाव और आपका समय बताती है। सामने वाले के मन में क्या है या वह क्या फ़ैसला करेगा, यह कुंडली नहीं बता सकती। उससे खुलकर, सच्ची बात करने की जगह भी वह नहीं ले सकती।
अपना सवाल लेकर आइए।
बताइए, किस बात का फ़ैसला करना है। मैं जवाब में बता दूँगा कि कब बात हो सकती है।